क्या सोचते हो मन में
नियम काल के अनुरूप
जरूर बदलते रहते हैं..
इसलिए कि कोई भी सत्य
जग में शाश्वत नहीं है
परिवर्तन एक नियम है
सब कुछ बदलते रहते हैं
पकड़े मत बैठो किसी का
विरासत में मिली है जो
पुस्तकीय ज्ञान वह
चिंतन – मनन में समर्पित
महानुभावों के त्याग का रूप है
ठुकरा मत दो उसे
अपने अनुभव के साथ जोड़कर
दुनिया में चलने का
एक आधार है भविष्य का..
न कि वही यथावत रूप में
अंधानुकरण करने का
स्वार्थ के जाल में
उसको रूढ़ि बनाकर
हुकूमत चलाने का।
मनुष्य को जोड़ना
एक दूसरे के हित में
परस्पर सहयोग करते हुए
कदम – कदम बढ़ाने के लिए
लोगों को तैयार करना
एक दूसरे के मन में प्रेम,
भाईचारे का बीज बोना,
लोक मंगलकारी मानवीय चेतना
हर दिल में विकसित करना
बड़ों का सबसे बड़ी जिम्मेदारी है
अपने आचरण के बल पर
कुछ कर दिखाना असली जीत है
अपने जीवन का कार्य है
समाज के हित में जोड़ना
दिल से सबको स्वीकार करना
आम बात तो नहीं है
वही सार्थक जीवन का मूल है।
