मैं भारत हूँ
हाँ, मैं भारत हूँ…
सृष्टि के आरंभ से आज तक
अमर गाथाओं का प्रवाह हूँ।
विश्वगुरु कहलाने का गौरव लिए
मैं ज्ञान का दीप,
संस्कार की राह हूँ।
मैं वह भूमि हूँ…
जहाँ राम के चरण पड़े,
जहाँ कृष्ण की बंसी बजी,
जहाँ बुद्ध के वचनों से जग जागा,
जहाँ हर प्रातः हवा में गीता का संगीत गूँजा।
मैं वह मिट्टी हूँ…
जिसमें तप है,तेज है,त्याग है,
जहाँ हर कण में
ऋषियों का त्याग है।
देवता भी झुकते हैं मेरी धरती पर,
क्योंकि मैं ही तो
देवभूमि भारत हूँ।
हाँ, मैं भारत हूँ…
मेरे आँचल में करुणा है,
मेरे शब्दों में सत्य का उजास है,
मेरे हृदय में प्रेम का
अथाह सागर है।
मैं दिखावे से नहीं,
भाव से जग को बाँधता हूँ,
वेदों का जन्मदाता,
गीता-रामायण का रचयिता हूँ।
मेरी हर श्वास एक प्रार्थना है,
हर कदम धर्म का पथ है,
हर आँसू तप का रत्न है।
मैं अमर सत्य का ग्रंथ हूँ,
पढ़ते-पढ़ते थक जाओगे,
पर जितना पढ़ोगे मुझे
उतना ही प्यासे रह जाओगे।
महान आत्माओं की धरती हूँ मैं,
अनगिनत पन्नों की किताब हूँ मैं।
हर युग में नया अध्याय लिखती हूँ,
हर पीढ़ी को नई दिशा दिखाती हूँ।
हाँ, मैं भारत हूँ…
मैं वह सूरज हूँ जो कभी नहीं ढलता,
मैं वह दीपक हूँ जो
अंधियारे में भी जलता।
सभी देशों से अलग,
सत्य,शांति,सद्भाव का प्रतीक,
मैं अनंत,अद्वितीय,अमर भारत हूँ।
— डॉ. निशा नंदिनी भारतीय
