कविता

पीछे मुड़ कर मत देखना

जब भी गहरा
अंधकार हो
आंखों के सामने
सब धुंधला हो
उस पल ईश्वर के
नाम….
अपने कर्मो की सदा
लिए
मन का विश्वास का
एक छोटा सा दीया
जला देना…..
दीये की रोशनी में
आस की शक्ति लिए
अंधेरे को चीरते हुए
अपने कदम को बस
आगे बढ़ा देना
डरना मत…
खुद को खोने से
ईश्वर है पीछे
बस ये विश्वास पे अडिग
बस चलते रहना…..
ज़िंदगी के मुश्किलों से
लड़ते और बढ़ते रहना….
विश्वास से थामना
ईश्वर का हाथ…
अपनी मंज़िलो को
अपनी ज़िंदगी के लिए
बस पाते रहना और
चलते रहना…
कि पीछे मुड़ कर मत देखना
साथ छूटा कौन, क्योंकि
जींवन का सच
सबसे निभाते रहना..!!

— नंदिता

तनूजा नंदिता

नाम...... तनूजा नंदिता लखनऊ ...उत्तर प्रदेश शिक्षा....एम॰ ए० एंव डिप्लोमा होल्डर्स इन आफिस मैनेजमेंट कार्यरत... अकाउंटेंट​ इन प्राइवेट फर्म वर्ष 2002से लेखन में रुचि. ली... कुछ वर्षों तक लेखन से दूर नहीं... फिर फ़ेसबुक पर वर्ष 2013 से नंदिता के नाम से लेखन कार्य कर रही हूँ । मेरे प्रकाशित साझा संग्रह.... अहसास एक पल (सांझा काव्य संग्रह) शब्दों के रंग (सांझा काव्य संग्रह) अनकहे जज्बात (सांझा काव्य संग्रह ) सत्यम प्रभात (सांझा काव्य संग्रह ) शब्दों के कलम (सांझा काव्य संग्रह ) मधुबन (काव्यसंग्रह) तितिक्षा (कहानी संग्रह) काव्यगंगा-1 (काव्यसंग्रह) लोकजंग, शिखर विजय व राजस्थान की जान नामक पत्रिका में समय समय पर रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है । मेरा आने वाला स्वयं का एकल काव्य संग्रह... मेरी रुह-अहसास का पंछी प्रकाशन प्रक्रिया में है नई काव्य संग्रह- काव्यगंगा भी प्रकिया में है कहानी संग्रह भी प्रक्रिया में है संपर्क e-mail logontanu@gmail.com Facebook gnanditadas@yahoo.com