हाइकु/सेदोका

उठो अपने सपनों के लिए

भोर का तारा,
अब भी आँखों में है —
चलो उसी ओर।

पंख थके हों भी,
आसमान बुलाए —
विश्वास रखो।

मिट्टी की खुशबू,
कहती है हर पल —
बीज बनो फिर से।

राहें टेढ़ी हैं,
पर कदमों में जिद —
मंज़िल मुस्कुराए।

बादल रुकेंगे,
पर सूरज आएगा —
हिम्मत जगाओ।

स्वप्न अगर टूटे,
तो राख में देखो —
नई चिंगारी।

मन की नदिया,
पत्थरों से कहती —
“मैं रुक न पाऊँ।”

हर गिरावट में,
एक सीख छिपी है —
उठो, फिर बढ़ो।

— डॉ. अशोक, पटना

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com