सर्वदर्शी
किताबों के बाद
इंसानों को पढ़ने का
शौक पैदा हुआ,
इतना पढ़ा
कि वो भी पढ़ लिया
जो कभी
नहीं पढ़ना चाहिए था
उनके अंतर्मन का।
तुमको देखने के बाद
इंसानों को देखने का
शौक पैदा हुआ,
इतना देखा
कि वो भी देख लिया
जो वो
छुपाना चाहते थे
सदा दुनिया से।
— डॉ. राजीव डोगरा
