गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिल पर जमी तेरी यादों की बर्फ पिघलनी चाहिए,
बनकर आंसू आंखों से दर्द की गंगा निकलनी चाहिए।

झूठ फरेब कितना था तेरी बातों में अब पता चला,
मेरी तरह तू भी विरह की अग्नि में जलनी चाहिए।

कितनी खुश हो तुम आज मुझ पर इल्जाम लगाकर,
इक रोज तेरी खुशियों की बुनियाद हिलनी चाहिए।

दर्द उठे तेरे सीने में, चाहत जगे इक मुलाकात की,
फिर मैं मुस्कुराऊँ तुम रोओ हवा ऐसी चलनी चाहिए।

सुनो! “विकास” नहीं करता रुसवा तुम्हें यूं सरेआम,
पर मोहब्बत की ये रिवायत अब बदलनी चाहिए।

— डॉ. विकास शर्मा

डॉ. विकास शर्मा

Shastri Nagar Rohtak C/o लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल्स, नजदीक केडीएम स्कूल, फ्रेंड्स कॉलोनी, सोहना - 122103 Mob. No. - 9996737200, 9996734200