कविता

वतन प्रथम ए पिया

माना की दुल्हन बन आयी तेरी मैं पिया,
पर मेरे प्रियवर है भारत भी मेरा जिया,
रोकूंगी कैसे तुझे सुन ओ साथिया
प्रहरी तू है पहले फिर मेरा जोगिया।

सरहद पे अखियाँ लगाए मेरे ये नैन,
आँखों में नींद नहीं ना मुझको आये चैन,
तेरी हँसी को सुन शुकुन आये जोगिया
बिरहन ये राह तके सुन ले तू मेरे पिया।

अधरों से क्षण भर मिलन का बस योग था
मिलना बिछड़ना यह कैसा संयोग था,
मेरी सुधि में बसी हर एक वो क्षण है पिया,
अन्तस् स्पंदित बस धड़कन तेरी है पिया।

तेरे भी दिल ने क्या मुझको क्षण भर है जिया,
बिरहन ये राह तके सुन ले तू मेरे पिया|

माना की दुल्हन बन आयी तेरी मैं पिया
पर मेरे प्रियवर है भारत भी मेरा जिया
रोकूंगी कैसे तुझे सुन ओ साथिया
प्रहरी तू है पहले फिर मेरा जोगिया।

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com