इश्क़ है डरता नहीं
ख़त आग बिन जलता नहीं।
जलता नहीं उड़ता नहीं।।
यूं रातों में सूरज कभी।
हमको कहीं दिखता नहीं।।
कितनी कोशिश कर लो मगर।
ये इश्क है डरता नहीं।।
लिखी मुहब्बत पर रज़ा।
आहों से दिल भरता नहीं।।
ये इश्क है यारों मेरे।
इससे कोई बचता नहीं।।
— प्रीती श्रीवास्तव
