ग़ज़ल
हर सीधा सादा आदमी नादान नहीं होता
उनके मन की बात का अनुमान नहीं होता
समझकर भी न समझना चाहे बात को यारो
ऐसे लोगों को समझाना आसान नहीं होता
बातों में निकाल देते हैं मन की भड़ास को
हर चाय के प्याले में तूफ़ान नहीं होता
हमने मुसीबत में उनका साथ दिया है कितना
इस बात का यारो कोई अहसान नहीं होता
दिल के जज़्बात को सरे आम ग़ज़ल में बाँधे
हर शायर ऐसी हिम्मत का ‘अंजान’ नहीं होता
— डॉ. विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’
