समय
समय निर्लिप्त है…
चले मौन चरण से,
थकता कभी न राही है,
अम्बर का यह बूढ़ा प्रहरी
लिखता सबकी गवाही है।
न पूछे यह
कभी फल–आकांक्षा,
न चाहे यह त्वरित परिणाम,
जो कर्म-पथ पर अडिग रहे,
‘समय’ करे उसे प्रणाम।
समय सिखाता-
है काया नश्वर,
पर कर्मों का है तेज अमर,
क्षणभंगुर जीवन में भी,
बन जाओ युगों का अमिट स्वर।
अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’
