अटल बिहारी वाजपेयी जी
दिल में जिनके देशभक्ति की अविरल धारा सतत बहती थी,
कलम उनकी सर्व सशक्त हर दुःख को बेख़ौफ़ कहती थी,
रुकती कभी न, डरती नहीं, गैरों के अनगिनत अत्याचारों से वो,
नागरिकों के स्वतंत्र व्यक्तित्व की सदैव व्याख्या करती वो ।
अटल जी की ऑंखों में स्वप्न उन्नत शक्तिशाली स्वदेश के थे,
लक्ष्य उनका सुरभित सुंदर सर्वांगीण विकसित भारत देश के थे,
राष्ट्र धर्म के रक्षक, कार्यकर्ता, सेवक, अटल सिद्धांतों वाले थे वे,
देश भक्त, पत्रकार, उच्चतम सिरमौर सिरोमणी गुणों वाले थे वे ।
हार में भी जीत का बीज अंकुरित करने का हुनर था उनमें,
एक महान दार्शनिक कवि स्वच्छ सोच भावों की गहरी पकड़ थी जिनमें,
उन्होंने हौसलों के दम पर अपने स्वप्न को अंतिम सांस तक जिया,
माननीय अटल जी ने कीचड़ में ह्रदय “आनंद” कमल खिला दिया ।
ऋणी रहेगा राष्ट्र ही नहीं सारा संसार ऐसे सच्चे महापुरुष का,
साहस अदम्य अद्भुत ओजस प्रेरणादायक उनकी वाणी का,
मृत प्राणों को जागृत करने की विधा भली-भांति वे जानते थे,
अटल जी सत्य कर्तव्यनिष्ठ आदर्श महान क्रांतिकारी प्रधान जन नेता थे ।
— मोनिका डागा “आनंद”
