माफी की अहमियत
खामोश दिल बोले
एक शब्द में पिघले
जमी हुई दूरी
झुकी हुई आँखों में
सच की हल्की रोशनी
रिश्ते मुस्काएँ
माफी का एक लम्हा
सदियों का बोझ उतारे
मन हल्का हो जाए
कटु शब्दों के बीच
मौन बन जाए मरहम
घाव भरने लगें
अहंकार की दीवार
एक क्षण में ढह जाए
राह खुली दिखे
गलती स्वीकार
आत्मा का साहस है
कमज़ोरी नहीं
माफी से जन्मे
विश्वास के नन्हे बीज
फिर हरियाएँ
टूटे संवादों में
करुणा की दस्तक
सन्नाटा हटे
क्षमा का स्पर्श
मन को निर्मल कर दे
जल सी शीतलता
जो क्षमा सीख ले
वह स्वयं से जीते
शांति पाए
क्रोध की आँधी
क्षमा से थम जाती
नील गगन खुले
माफी की भाषा
बिना शब्द भी बोले
दिल समझ जाए
— डॉ. अशोक
