कविता

शब्दों की परिकल्पना

अनुमानित अंशों की शब्द रचना,
भेदों के संयोजन से बनी योजना।
बसन्त, ग्रीष्म, हेमंत, शीत की लहरें,
सामाजिक परिपेक्ष की बिडम्बना ।।

सुझावों स्वभावों की उमड़ती संवेदना,
तार्किक तथ्यों पर साक्ष्यों की कल्पना।।
विचारों, व्यवहारों, प्रयोगों, चरों की मुहरें,
ज्ञान अवलोकन उद्देश्यों की परिकल्पना ।।

उतार चढ़ावों की कसौटी लड़खड़ाती धाराएं,
मधुर स्वर संगीत और संकल्पित योजनाएं।
चहुं ओर प्रकृति पर लगी संशोधित लकीरें,
दिशाओं का रूख मोड़ने की परियोजनाएं ।।

ढलती गुलाबी धूप ने थामी नज़ाकत रूहानी,
शबनम की बूंदों ने समेट ली भोर की कहानी।
लिपटी सुनियोजित सीमाओं की मधुर कलीरें,
चिन्तन मनन स्पष्टीकरण सिद्धान्तों की जुबानी।।

— सन्तोषी किमोठी वशिष्ठ “सहजा”

सन्तोषी किमोठी वशिष्ठ

स्नातकोत्तर (हिन्दी)