लघुकथा

हमने जीना सीखा है

तुमसे प्यार करने के बाद तो हमने जीना सीखा है।

सागर तट पर अपने प्रियतम सौरभ के कंधे पर सिर रख सारिका यादों में खोई  थी।

अगर जीवन का अंत करने निकली सारिका को सौरभ न बचाता तो? 

चलचित्र की तरह जिंदगी के पन्ने पलटने लगे।

आनंद के प्यार में दीवानी वह सब कुछ छोड़कर घर से भाग आई थी। उसे खाली हाथ आया देखकर आनंद ने बहाना बना कर उसे वापस घर भेज दिया था। प्यार में अँधी सारिका आनंद की सच्चाई, चालाकी बरदाश्त न कर पाई।

बस छलाँग लगाने वाली ही थी कि सौरभ ने उसे रोक दिया।

उसके निर्मल, निष्कपट प्रेम ने उसे नई  जिंदगी दी।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८