ग़ज़ल
करते नहीं मुहब्बत दिल में फतूर होगा।
गर इश्क है तुम्हें तो वादा जरूर होगा।
ख़त थे लिखे कभी वो पढ़ते रहे गमी में,
मर्दुम कहें शराबी इश्के सरूर होगा।
हुस्न-ए- शबाब ऐसा मुमताज सी लगे है,
चढ़ती हुई जवानी उस का गुरूर होगा।
जिन के पढ़े कसीदे पहचान बस यही है,
पर्दानशीन मुखड़ा दमदार नूर होगा।
मरते रहे सदा वो दिल को लगा हमीं से,
समझे नहीं मुहब्बत मेरा कसूर होगा।
— शिव सन्याल
