निरंतर हो रहे निवेश से बढ़ रही उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार
भारत की सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश आज एक ऐतिहासिक आर्थिक रूपांतरण के दौर से गुज़र रहा है। जो राज्य कभी अपनी धीमी विकास गति, कमज़ोर औद्योगिक आधार और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के लिए जाना जाता था, वह आज निवेशकों की प्राथमिकता सूची में तेज़ी से ऊपर चढ़ रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 25.48 लाख करोड़ रुपए रहा — जो उससे पिछले वित्त वर्ष के 22.58 लाख करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। राष्ट्रीय औसत जीडीपी वृद्धि दर 9.6 प्रतिशत के निकट रहते हुए उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था बन गया है। यह तथ्य स्वयं इस बात का प्रमाण है कि निरंतर हो रहे निवेश और बुनियादी ढाँचे के विकास ने प्रदेश की विकास गाथा को वास्तव में एक नई दिशा दी है।
आर्थिक बुनियाद : संख्याओं की भाषा में प्रगति : उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आज भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देती है और यह देश की दूसरी सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए 30.77 लाख करोड़ रुपए का GSDP हासिल करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 2024-25 के बजट में राज्य का GSDP 24,99,076 करोड़ रुपए अनुमानित था जो 2023-24 के संशोधित अनुमान से लगभग 5.8 प्रतिशत अधिक था। इसी क्रम में 2025-26 में उत्तर प्रदेश की GSDP विकास दर 11.6 प्रतिशत दर्ज की गई — जो राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर से भी अधिक थी। ये संख्याएँ केवल सरकारी दावे नहीं बल्कि PRS Legislative Research और अन्य स्वतंत्र विश्लेषण संस्थाओं द्वारा प्रमाणित तथ्य हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। यह एक विशाल लक्ष्य अवश्य है, परंतु जिस रफ्तार से आधारभूत ढाँचे का निर्माण हो रहा है, विदेशी एवं घरेलू निवेश आ रहा है और औद्योगिक कॉरिडोर बन रहे हैं — उसे देखते हुए यह महज़ एक स्वप्न नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 : निवेश का नया अध्याय : फरवरी 2023 में आयोजित उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (UPGIS 2023) प्रदेश के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। तीन दिवसीय इस महासम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 फरवरी 2023 को किया था। इस समिट में कुल 19,058 MoU (समझौता ज्ञापन) हस्ताक्षरित हुए और लगभग 32.92 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों के ज़रिए लगभग 93 लाख 82 हज़ार से अधिक रोज़गार सृजन की संभावना व्यक्त की गई। समिट में आईटी/आईटीईएस, बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि, डेयरी, शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और नागरिक उड्डयन समेत अनेक क्षेत्रों में निवेश की घोषणाएँ हुईं। IT/ITeS सेक्टर सबसे बड़ा विजेता रहा। सिंगापुर के निवेशकों ने आध्यात्मिक एवं इको-टूरिज्म के लिए 29,000 करोड़ रुपए के MoU पर हस्ताक्षर किए। चिकित्सा एवं फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में 63,475 करोड़ रुपए के प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह समिट केवल कागज़ी वादों तक सीमित नहीं रही — निवेश प्रस्तावों की ज़मीनी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने ‘निवेश सारथी’ नाम की ऑनलाइन निगरानी प्रणाली भी लागू की, जो MoU के क्रियान्वयन को ट्रैक करती है। यह अवश्य स्वीकार करना होगा कि निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश के बीच की खाई हमेशा मौजूद रहती है। The Federal जैसे स्वतंत्र विश्लेषकों ने भी सवाल उठाए हैं कि 33.5 लाख करोड़ रुपए के दावे कितने यथार्थ से मेल खाते हैं। परंतु तथ्य यह है कि ज़मीनी स्तर पर परियोजनाएँ गतिमान हैं — ग्रेटर नोएडा में फिल्म सिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का विकास कार्य प्रगति पर है।
बुनियादी ढाँचे में क्रांतिकारी बदलाव : किसी भी राज्य के विकास की गति का सबसे विश्वसनीय सूचकांक उसका बुनियादी ढाँचा होता है। उत्तर प्रदेश में आज एक्सप्रेसवे नेटवर्क, हवाई अड्डे, रेल नेटवर्क और औद्योगिक कॉरिडोर एक साथ विस्तार पा रहे हैं। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई और रेलवे नेटवर्क (16,000 किलोमीटर से अधिक) देश में सर्वाधिक है। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) और पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) — दोनों गौतम बुद्ध नगर के दादरी में आपस में मिलते हैं, जिससे राज्य की मालवाहन सुविधाएँ असाधारण रूप से सुदृढ़ हुई हैं। नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश की छवि बदली है। कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 2021 में परिचालन में आया, अयोध्या हवाई अड्डे का उद्घाटन दिसंबर 2023 में हुआ, बरेली हवाई अड्डे ने मार्च 2021 से उड़ानें शुरू कीं और नोएडा (जेवर) अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह हवाई अड्डा दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (DNGIR) के 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र में निवेश आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क की दृष्टि से भी प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (2016), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे — इन सभी के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) इन पाँच एक्सप्रेसवे के किनारे 5,800 हेक्टेयर में पूर्वांचल औद्योगिक कॉरिडोर का विकास कर रही है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के साथ 1,884 हेक्टेयर भूमि पर 1,500 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य चल रहा है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS), जो भारत की पहली इंटरसिटी मेट्रो है, आंशिक रूप से परिचालन में आ चुका है।
रक्षा एवं औद्योगिक कॉरिडोर : आत्मनिर्भर भारत का प्रवेश-द्वार : उत्तर प्रदेश में रक्षा कॉरिडोर की स्थापना देश की आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। इस परियोजना के अंतर्गत ब्रह्मोस मिसाइलों सहित विभिन्न रक्षा उपकरणों का निर्माण प्रदेश में किया जाएगा। UPEIDA इस कॉरिडोर के अंतर्गत निर्दिष्ट क्षेत्रों में वायु, जल और मिट्टी परीक्षण करा रही है ताकि परियोजनाएँ पूर्ण तकनीकी तैयारी के साथ आगे बढ़ें। यह कॉरिडोर न केवल रक्षा उत्पादन को स्थानीय बनाएगा, बल्कि उच्च-कौशल रोज़गार के अवसर भी सृजित करेगा। इसी क्रम में ललितपुर में 1,472 एकड़ भूमि पर बल्क फार्मा/ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है। झाँसी के निकट 33 गाँवों में 35,000 एकड़ भूमि पर बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) द्वारा एक नए औद्योगिक नगर की स्थापना की योजना है। लखनऊ में अशोक लेयलैंड की ई-बस विनिर्माण इकाई स्थापित हो रही है। जापानी कंपनी Fuji Silvertech ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 25 एकड़ भूमि पर अपना संयंत्र लगाया — यह UP की नई FDI नीति से लाभान्वित होने वाली पहली विदेशी कंपनी बनी।
बजट 2024-25 : विकास के लिए आक्रामक आर्थिक प्रतिबद्धता : वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने फरवरी 2024 में प्रस्तुत 2024-25 के बजट में राज्य के विकास के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता दर्शाई। कुल व्यय (ऋण चुकौती छोड़कर) 6,96,632 करोड़ रुपए अनुमानित किया गया — जो 2023-24 के संशोधित अनुमान से 14 प्रतिशत अधिक था। पूंजी परिव्यय — अर्थात् संपत्ति निर्माण पर व्यय — 2023-24 में 1,47,492 करोड़ रुपए था जो 2022-23 की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक था। यह लगातार बढ़ता पूंजी परिव्यय इस बात का संकेत है कि सरकार उपभोग की बजाए निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। PRS Legislative Research के विश्लेषण के अनुसार उत्तर प्रदेश ने अपने बजट का 6.7 प्रतिशत ऊर्जा क्षेत्र को आवंटित किया — जो राज्यों के औसत 4.7 प्रतिशत से अधिक है। शहरी विकास में भी 4.4 प्रतिशत आवंटन राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत से अधिक रहा। 2024-25 में राजस्व अधिशेष GSDP का 3 प्रतिशत (74,147 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान था। यह राजकोषीय अनुशासन राज्य की वित्तीय परिपक्वता को दर्शाता है।
पर्यटन और रोज़गार : नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला : उत्तर प्रदेश की आर्थिक कहानी केवल उद्योग और बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में 2026-27 के बजट चर्चा के दौरान उद्घाटन किया कि वर्ष 2025 में लगभग 156 करोड़ पर्यटकों ने उत्तर प्रदेश का भ्रमण किया — यह संख्या किसी भी राज्य के लिए अभूतपूर्व है। महाकुंभ, काशी कॉरिडोर, अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन और मथुरा-वृंदावन के पुनर्विकास ने धार्मिक पर्यटन को एक विशाल आर्थिक प्रेरक बना दिया है। इन्वेस्ट यूपी के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में प्रतिवर्ष 5,000 करोड़ रुपए के निवेश आकर्षण और 5 लाख लोगों को रोज़गार देने का लक्ष्य रखा गया है। बजट 2026-27 में प्रत्येक जनपद में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल रोज़गार एवं औद्योगिक ज़ोन’ स्थापित करने की घोषणा की गई है — जिसमें प्रत्येक ज़ोन पर 50 से 100 करोड़ रुपए का निवेश और लगभग 100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। अगले पाँच वर्षों में 100 नई टाउनशिप विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित है।
वैश्विक निवेश की ओर : सिंगापुर से लेकर यूरोप तक : उत्तर प्रदेश की बदलती छवि का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अब वैश्विक संस्थाएँ स्वयं प्रदेश में निवेश की संभावनाएँ तलाश रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर के अपने हालिया दौरे में सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (GIC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लिम चो किआट के साथ दीर्घकालिक निवेश पर बैठक की। GIC विश्व की प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंड संस्थाओं में से एक है जो भारत में बुनियादी ढाँचे, रियल एस्टेट, फिनटेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म में पहले से निवेश करती है। इस बैठक में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग, अक्षय ऊर्जा, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक रियल एस्टेट और MSME के लिए फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ तलाशी गईं। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य यूरोप दौरे पर थे। यह राजनयिक और व्यापारिक प्रयास दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अब घरेलू पूंजी से आगे बढ़कर वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की रणनीति पर चल रहा है।
चुनौतियाँ जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता : विकास की यह तस्वीर पूर्ण और निर्विवाद नहीं है। एक संतुलित संपादकीय दृष्टि के लिए यह भी देखना होगा कि उत्तर प्रदेश को 2029 तक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लिए अपनी GSDP वृद्धि दर को वर्तमान से 2.5 से तीन गुना बढ़ाना होगा — एक विशाल चुनौती। कृषि क्षेत्र, जो राज्य की अधिकांश ग्रामीण जनता की आजीविका का आधार है, को बजट में मात्र 2.9 प्रतिशत आवंटन मिलता है जो राष्ट्रीय औसत 5.8 प्रतिशत का लगभग आधा है। निवेश प्रस्तावों और उनके ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच का अंतर भी एक स्थायी चिंता का विषय है। MoU होना और उद्योग वास्तव में चालू होना — दो अलग-अलग बातें हैं। प्रतिबद्ध व्यय — जिसमें वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान शामिल हैं — राज्य की राजस्व प्राप्तियों का 53 प्रतिशत है, जो पूंजीगत परिव्यय के लिए उपलब्ध लचीलापन सीमित करता है। रोज़गार सृजन की गति भी उस स्तर पर नहीं है जिसकी ज़रूरत 25 करोड़ की जनसंख्या वाले राज्य को है।
संभावना और संकल्प का संगम : उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक नई ऊर्जा स्पष्ट दिखाई देती है। एक्सप्रेसवे के किनारे उगते औद्योगिक शहर, जेवर में बनता अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, ब्रह्मोस के लिए तैयार होता रक्षा कॉरिडोर, ललितपुर का फार्मा पार्क, 156 करोड़ पर्यटकों की आमद — ये सब संकेत हैं कि निवेश की नींव पर एक नई इमारत उठ रही है। GSDP की 11.6 प्रतिशत वृद्धि दर और राष्ट्रीय GDP में 8 प्रतिशत का योगदान इस परिवर्तन को संख्याओं में सिद्ध करता है। यह भी सत्य है कि विकास का अंतिम पैमाना GDP की वृद्धि दर नहीं, बल्कि उस विकास का आम नागरिक के जीवन-स्तर पर प्रभाव होता है। बुनियादी ढाँचे में किया गया निवेश तभी सार्थक होता है जब वह किसान के खेत से उत्पाद को बाज़ार तक और युवा को शिक्षा से रोज़गार तक पहुँचाने में सक्षम हो। उत्तर प्रदेश की सरकार और नागरिक समाज दोनों के सामने यह जिम्मेदारी है कि निवेश की यह बाढ़ केवल बड़े शहरों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के 75 ज़िलों में फैले करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक भी इसका लाभ पहुँचे। संक्षेप में, उत्तर प्रदेश आज एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहाँ इतिहास और भविष्य आमने-सामने हैं। निरंतर हो रहे निवेश ने विकास की जो रफ्तार पकड़ी है, वह शुभ संकेत है — लेकिन इस रफ्तार को टिकाऊ, समावेशी और न्यायसंगत बनाने का काम अभी बाकी है। यदि नीति और क्रियान्वयन में यही गति और दूरदृष्टि बनी रही, तो उत्तर प्रदेश न केवल भारत की बल्कि एशिया की उभरती आर्थिक शक्तियों में अपना नाम लिखवाने में सफल होगा।
— डॉ. शैलेश शुक्ला
