मुक्तक/दोहा

मुक्तक

इज़्ज़त उछाली बाप की जिस प्यार के लिए
उसने ही तेरे जिस्म के टुकड़े कई किए
क़ुरआँ में जो लिखी नहीं बतला के बात वो
जो थे कलाम उनको भी अफ़ज़ल बना दिए
— त्रिशिका धरा

त्रिशिका धरा

कवयित्री एवं लेखिका कानपुर, उत्तर प्रदेश