जिगर के टुकड़े-नीला ड्रम
परिवार की खुशियां छिनी बदनाम ‘नीला ड्रम’,
शुरू हुआ सिलसिला मुस्कान ने फैलाया भ्रम।
कितनी ‘हिम्मत’ युवा कर लेते रिश्तों में हैं जंग,
‘जान’ की कीमत न समझते दुनिया होती दंग।
ये बहुतेरे देख रहे हैं हम सामंजस्य का अभाव,
गुस्सैल होता जा रहा हैं युवा पीढ़ी का स्वभाव।
जिगर के टुकड़े कर रहे ‘पिता’ के टुकड़े-टुकड़े,
मानवेन्द्र-अक्षत का प्रताप रिश्ते बिखरे-बिखरे।
संतानों पर करियर बनाने का न बनाओ दबाव,
विवादों को ना जन्म दो-हिंसक व्यवहार तनाव।
हे परिजनों गुस्सा पहचानों बच्चों के हाव-भाव,
हो निर्मित स्वच्छ वातावरण व संवाद के प्रभाव।
(संदर्भ-बेटे ने की पिता हत्या ड्रम में छिपाया शव)
— संजय एम तराणेकर
