भजन/भावगीत

जीवन प्रभु को समर्पण

जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
सब कुछ प्रभु जी तेरा, कुछ साथ नहीं मैं लाया।
मन चंचल है प्रभु मेरा, काम क्रोध का है बासा।
मोह माया का पूतला हूॅं, मद लोभ का हूॅं प्यासा।
मिट जाएं विकार यह सारे,रहे सिर पे तेरा साया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
करूं नेक काम में ईश्वर,करूं दीन की नित सेवा।
हो कर्म सदा ही सुधरा, मिले ज्ञान प्रीत का मेवा।
मेरी श्रृद्धा भक्ति समर्पित,जो ज्ञान तुम से पाया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
भूला भटका हूॅं भगवन,मुझे शरण तुम लगा लो।
रहे सिमरन नित प्रभु तेरा,मन प्रेम जोत जगा दो।
रहे निर्मल ही मन मेरा, दोष रहित हो मेरी काया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।

— शिव सन्याल

*शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995