जीवन प्रभु को समर्पण
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
सब कुछ प्रभु जी तेरा, कुछ साथ नहीं मैं लाया।
मन चंचल है प्रभु मेरा, काम क्रोध का है बासा।
मोह माया का पूतला हूॅं, मद लोभ का हूॅं प्यासा।
मिट जाएं विकार यह सारे,रहे सिर पे तेरा साया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
करूं नेक काम में ईश्वर,करूं दीन की नित सेवा।
हो कर्म सदा ही सुधरा, मिले ज्ञान प्रीत का मेवा।
मेरी श्रृद्धा भक्ति समर्पित,जो ज्ञान तुम से पाया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
भूला भटका हूॅं भगवन,मुझे शरण तुम लगा लो।
रहे सिमरन नित प्रभु तेरा,मन प्रेम जोत जगा दो।
रहे निर्मल ही मन मेरा, दोष रहित हो मेरी काया।
जीवन प्रभु को समर्पण, मैं शरण तेरी हूॅं आया।
— शिव सन्याल
