मुक्तक/दोहा मुक्तक *डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन 02/03/202602/03/2026 प्यार का करघा, सुख-दुःख ताना-बाना,जीवन चदरिया, भेद किसी ने ना जाना।ताने और बाने पर, दौरे बहस जारी है,जिंदगी का मकसद, किसी ने ना जाना। — डॉ अ कीर्तिवर्धन