वैश्विक अशांति के बीच रंगों की होली और भारत की स्थिरता
वर्तमान समय में विश्व के अनेक देश युद्ध, गृहयुद्ध और गंभीर अस्थिरता से जूझ रहे हैं। पूर्वी यूरोप में यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष जारी है। पश्चिम एशिया में इजरायल–फिलिस्तीन तनाव, सीरिया और यमन की अस्थिरता, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव, तथा सूडान की आंतरिक परिस्थितियाँ वैश्विक चिंता का कारण बनी हुई हैं।
दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान और पाकिस्तान निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमारे पड़ोस में श्रीलंका आर्थिक संकट से उबरने का प्रयास कर रहा है, बांग्लादेश राजनीतिक व आर्थिक दबावों से गुजर रहा है, और वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्र अस्थिरता के साये में हैं। मध्य पूर्व के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है और अफ्रीका के कुछ देशों में भी आंतरिक संघर्ष जारी हैं। सच कहा जाए तो चारों ओर असुरक्षा और अनिश्चितता का वातावरण दिखाई देता है।
ऐसे वैश्विक परिदृश्य में भारत का शांति, आत्मविश्वास और प्रगति के साथ आगे बढ़ना विशेष महत्व रखता है। इस होली के पावन अवसर पर, जहाँ अनेक देशों में भय और अस्थिरता है, वहीं भारत में रंगों का उत्सव उल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है। विश्व कप जैसे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन संपन्न हो रहे हैं, विविध खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित हो रही हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे भविष्य के विषयों पर वैश्विक सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भारत यह संदेश दे रहा है कि सांस्कृतिक जीवंतता और राष्ट्रीय सुरक्षा साथ-साथ चल सकती हैं।
भारत की संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति ने उसे वैश्विक ध्रुवीकरण से दूर रखते हुए सभी प्रमुख शक्तियों से संवाद बनाए रखने में सक्षम बनाया है। एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग है, तो दूसरी ओर रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध सुदृढ़ हैं। पश्चिम एशिया के देशों — सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात — के साथ भी मजबूत सहभागिता बनी हुई है।
वर्तमान नेतृत्व की दृढ़ इच्छाशक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता पर बल और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका ने भारत को एक स्थिर, विश्वसनीय और उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित किया है। चारों ओर जहाँ संघर्ष और संकट हैं, वहीं भारत शांति, विकास और सांस्कृतिक उत्सवों के साथ निरंतर गति से आगे बढ़ रहा है।
जब संसार के अनेक हिस्सों में युद्ध की आहट है, तब भारत में होली के रंग, खेलों का उत्साह और नवाचार की ऊर्जा यह सिद्ध करती है कि दूरदर्शी नीति, सशक्त नेतृत्व और सांस्कृतिक आधार किसी राष्ट्र को कठिन समय में भी स्थिर रख सकते हैं।
— राकेश शुक्ला
