स्वास्थ्य

शरीर का पोषण आवश्यक

हालांकि हमारी देह नश्वर है और यह अन्त में हमारा साथ छोड़ देती है। इसलिए विद्वान् लोग कहते हैं कि हमें अपने शरीर के बजाय आत्मा का पोषण करना चाहिए। यह बात आध्यात्मिक रूप से सत्य हो सकती है, लेकिन सांसारिक दृष्टि से ऐसा करना हमारे हित में नहीं है। शास्त्रों का वचन है- ‘शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्’ अर्थात् हमारा यह शरीर धर्म का एक साधन है। इसलिए अपने धर्म का पालन करने के लिए इसको सदा स्वस्थ रखना हम सबका कर्तव्य है। रोगी व्यक्ति न तो अपना भला कर सकता है और न किसी अन्य का। वह अपने परिवार और समाज पर बोझ होता है।
अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें सन्तुलित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में जाते हैं। सही आहार का चुनाव करके हम सभी आवश्यक पोषक तत्व शरीर में पहुँचा सकते हैं। सही पोषण से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है और सुखी जीवन व्यतीत करता है। इसलिए हमें अलग-अलग प्रकार की ऐसी खाद्य वस्तुओं का चुनाव करना चाहिए, जिनसे हमारे शरीर को आवश्यक और पूरा पोषण मिल सके।
हमारे दैनिक आहार में निम्न तत्वों की पूर्ति होना आवश्यक है- प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, जल, खनिज, विटामिन और रेशा यानी फाइबर। यहाँ हम क्रमशः इन तत्वों की आवश्यकता और पूर्ति की चर्चा करेंगे।
प्रोटीन: आज जानते होंगे कि हमारे शरीर में कोशिकाएँ निरन्तर बनती और टूटती रहती हैं। प्रोटीन हमारे शरीर की कोशिकाओं की वृद्धि और पूर्ति, हीमोग्लोबिन बनाये रखने और कई आन्तरिक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक होता है। यह हमें दालों, फलियों, दूध, सोया, मूँगफली, अंडा, मछली आदि से मिलता है।
कार्बोहाइड्रेट: यह हमारी ऊर्जा का स्रोत होता है, अर्थात् इससे हमें ऊर्जा मिलती है। यह हमारे शरीर की टूट-फूट की भी मरम्मत करता है। हमें कार्बोहाइड्रेट साबुत अनाज, श्रीअन्न, दलिया आदि से मिलता है। अधिक रेशेवाला कार्बोहाइड्रेट अधिक उपयोगी होता है। कार्बोहाइड्रेट का पाचन धीरे-धीरे होता है और यह धीरे-धीरे खून में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ाता है।
वसा (चिकनाई): हमारे शरीर का वसा की आवश्यकता कम मात्रा में होती है। यह हमें मक्खन, तेल, घी, मूँगफली आदि से मिलता है।
खनिज और विटामिन: इनकी आवश्यकता हमें विभिन्न रोगों से अपने शरीर को बचाये रखने के लिए होती है। खनिज और विटामिन हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को मजबूत करते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाये रखने में सहायक होते हैं। इनसे हमारे शरीर में हार्मोन भी नियंत्रित रहते हैं। खनिज और विटामिन हमें दूध और दुग्ध उत्पाद, फल, सब्जियों आदि से मिलते हैं। इसलिए हमें प्रतिदिन बदल-बदलकर फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, ताकि हमारे शरीर में सभी आवश्यक खनिजों और विटामिनों की पूर्ति होती रहे।
इन आवश्यक तत्वों की कमी या अधिकता से हमारे शरीर में विभिन्न रोग होते हैं या हो सकते हैं। इसलिए इनमें सन्तुलन बना रहना आवश्यक होता है। आपके शरीर में किस तत्व की कमी या अधिकता है यह आपके रक्त और मूत्र की जाँच करके पता लगाया जा सकता है और कोई तत्व असामान्य पाये जाने पर उसकी उचित मात्रा अपने खान-पान में सुधार करके की जा सकती है, जो पूरी तरह प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धान्तों के अनुकूल है।
यद्यपि इनमें से अधिकांश तत्वों की पूर्ति गोलियाँ खाकर भी की जा सकती है, जैसा कि ऐलोपैथिक डॉक्टर कराते हैं, परन्तु ऐसी गोलियाँ निरापद नहीं होतीं और उनका साइड इफैक्ट भी हो सकता है, जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसलिए अपने खान-पान और रहन-सहन में सुधार करना ही शरीर को आवश्यक पोषण देने का सबसे अच्छा उपाय है। जहाँ तक सम्भव हो दवाओं के सेवन से बचना चाहिए।

— डॉ. विजय कुमार सिंघल

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com