राजनीति

आस्था, संस्कृति और वैश्विक पहचान : भारत बन रहा ‘सॉफ्ट पावर’ का नया केंद्र

यह एक ऐसा युग है जब राष्ट्रों की शक्ति केवल उनकी सैन्य क्षमता या आर्थिक संपदा से नहीं मापी जाती, बल्कि उनकी सांस्कृतिक आभा, सभ्यतागत विरासत और वैश्विक आकर्षण से भी आंकी जाती है। अमेरिकी विद्वान जोसेफ नाइ ने 1990 में फॉरेन पॉलिसी पत्रिका में ‘सॉफ्ट पावर’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जो किसी राष्ट्र की उस क्षमता को परिभाषित करती है जिसके द्वारा वह बिना बलप्रयोग के अन्य देशों को अपनी ओर आकर्षित करता है। भारत, जो सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं, आध्यात्मिक दर्शन और विविधता में एकता के अनूठे चरित्र का वाहक है, आज वैश्विक मंच पर एक नए और शक्तिशाली सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इक्कीसवीं सदी में भारत की असली शक्ति उसके परमाणु शस्त्रागार या जीडीपी के आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक गहराई और आध्यात्मिक विरासत में निहित है। फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट जैसे वैश्विक आयोजनों में भारत की यह सांस्कृतिक-तकनीकी महत्त्वाकांक्षा और भी स्पष्ट हुई।

भारत की सॉफ्ट पावर यात्रा की सबसे उज्ज्वल मिसाल है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस। संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में भारत के प्रस्ताव पर 177 देशों के समर्थन से 21 जून को यह दिवस मनाने की घोषणा की। 2024 में 190 से अधिक देशों में यह दिवस मनाया गया और विश्व स्तर पर 24.53 करोड़ प्रतिभागी इससे जुड़े। उत्तर प्रदेश ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए 25.93 लाख लोगों को योग प्रतिज्ञा में शामिल किया। पर्यवेक्षक रिसर्च फाउंडेशन की मार्च 2025 की विशेष रिपोर्ट ‘ए डिकेडल स्नैपशॉट ऑफ इंडियाज सॉफ्ट पावर स्ट्रैटेजीज (2014-2024)’ (रिपोर्ट संख्या 251) में स्पष्ट किया गया है कि 2014 से 2024 के दशक में भारत की सॉफ्ट पावर रणनीति अधिक सुसंगत, रणनीतिक और महत्त्वाकांक्षी हुई है। इस अवधि में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की जिसमें 100 से अधिक देशों ने फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए और 90 से अधिक ने इसे अनुमोदित किया।

2025 में आयोजित विश्व ऑडियो-विजुअल और एंटरटेनमेंट समिट — वेव्स 2025 — ने भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को एक नई आर्थिक भाषा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ का नारा दिया। उन्होंने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ — अर्थात रचनात्मक उद्योगों की अर्थव्यवस्था — की अवधारणा को रेखांकित किया। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इस अवसर पर बताया कि 2023 में भारत में बनी सामग्री को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने 45 अरब घंटे देखा। 10 करोड़ से अधिक भारतीय यूट्यूब चैनलों ने पिछले वर्ष सामग्री अपलोड की और उनमें से 15,000 से अधिक ने 10 लाख से अधिक ग्राहक अर्जित किए। यह डेटा इस बात का प्रमाण है कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था अब वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव की एक प्रमुख धुरी बन रही है।

भारतीय प्रवासी समुदाय, जो विश्व में सर्वाधिक बड़े और प्रभावशाली प्रवासी समुदायों में से एक है, देश की सॉफ्ट पावर का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। न्यूयॉर्क नगर ने 2024 में दीपावली को आधिकारिक विद्यालय अवकाश घोषित किया — यह भारतीय प्रवासी समुदाय की पैरवी का प्रत्यक्ष परिणाम था। 2025 में भारत का प्रवासी भारतीय सम्मेलन जनवरी में आयोजित हुआ जहां अनेक देशों के भारतीय मूल के नागरिकों ने मातृभूमि से अपनी गहरी जड़ों को नवीनीकृत किया। संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने दिसंबर 2022 में ‘इंडियाज सॉफ्ट पावर एंड कल्चरल डिप्लोमेसी: प्रॉस्पेक्ट्स एंड लिमिटेशन्स’ शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आईसीसीआर की प्रभावी सांस्कृतिक कूटनीति के लिए वार्षिक बजट में 500 करोड़ रुपए की वृद्धि का सुझाव दिया गया था।

भारतीय सिनेमा और ओटीटी कंटेंट ने 2025 में वैश्विक दर्शकों में अपनी पहुंच और गहरी की है। 2025 में जयपुर में आयोजित 25वें आईफा पुरस्कार समारोह में ‘लापता लेडीज’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित 10 पुरस्कार मिले, जिससे भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिली। स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय की 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल रैंकिंग के अनुसार भारत एआई प्रतिभा, शोध गहराई, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और आर्थिक प्रभाव के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है — यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर को भी प्रमाणित करता है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर — आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर — को विकासशील देश अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो भारत की तकनीकी सॉफ्ट पावर का एक नया आयाम है।

साहित्य और पुस्तक-संस्कृति के क्षेत्र में भी भारत का अंतरराष्ट्रीय पदचिह्न गहरा हो रहा है। 2025 में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में 1,000 लेखकों, 600 से अधिक साहित्यिक कार्यक्रमों और 20 लाख आगंतुकों की भागीदारी हुई, जिसमें रूस सम्मानित अतिथि देश था। कलिंग साहित्य महोत्सव 2025 में विभिन्न विधाओं के उत्कृष्ट लेखकों को पुरस्कृत किया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और कला-महोत्सव वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत हो रहे हैं। गोवा का सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल अंतरविषयक कला प्रस्तुतियों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचाना जाने लगा है। ये सभी तथ्य मिलकर इस बात को प्रमाणित करते हैं कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी अब केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक-आर्थिक प्रभाव का एक जीवंत प्रवाह है।

भारत की सॉफ्ट पावर रणनीति की एक सीमा भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने स्वयं स्वीकार किया है कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति चार प्रमुख सीमाओं से ग्रस्त है — अपर्याप्त वित्तपोषण, विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय का अभाव, कुशल जनशक्ति की कमी और आईसीसीआर के अधिदेश में स्पष्टता की कमी। चीन अपने कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट्स और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से सांस्कृतिक कूटनीति में कहीं अधिक निवेश करता है। 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय सशस्त्र संघर्ष और अमेरिका द्वारा मध्यस्थता के दावे ने भारत की वैश्विक शांतिदूत की छवि को कुछ हद तक प्रभावित किया। हालांकि, इसके बावजूद भारत की रचनात्मकता, आध्यात्मिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक आकर्षण को चुनौती देना किसी के लिए भी आसान नहीं है।

फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा और 27 द्विपक्षीय परिणामों के साथ ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में उन्नयन भारत की सांस्कृतिक-तकनीकी कूटनीति का एक नया अध्याय है। जनवरी 2026 में यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की नई दिल्ली यात्रा और भारत-यूरोपीय संघ के बीच 20 वर्षों की वार्ता के बाद मुक्त व्यापार समझौते की संभावना ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित किया। यूएसडी के अनुसार भारत का एआई-संचालित प्रौद्योगिकी क्षेत्र 2025 में लगभग 280 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करने का अनुमान था — यह आंकड़ा भारत की बौद्धिक और तकनीकी सॉफ्ट पावर को उसकी आर्थिक शक्ति से जोड़ता है।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि मार्च 2026 तक भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर की यात्रा एक नई परिपक्वता की ओर अग्रसर है। उसकी योग-परंपरा 190 से अधिक देशों में घर बना चुकी है, उसका ऑरेंज इकोनॉमी-मॉडल वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था में नई जगह बना रहा है, उसके प्रवासी विश्व की राजधानियों में सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका निभा रहे हैं और उसका डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर दर्जनों देशों के लिए प्रेरणा-स्रोत बन गया है। यह यात्रा पूर्ण नहीं हुई — संसाधनों की कमी, संस्थागत बिखराव और भू-राजनीतिक चुनौतियां शेष हैं। फिर भी, ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के दर्शन से निर्देशित भारत की यह सांस्कृतिक आकांक्षा आज वैश्विक मानचित्र पर एक नई और स्थायी छाप छोड़ रही है — और यह छाप केवल कूटनीतिक रणनीति का परिणाम नहीं, बल्कि एक जीवंत, गतिशील और आत्मविश्वासी सभ्यता की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।

— डॉ. शैलेश शुक्ला

डॉ. शैलेश शुक्ला

राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी [भारत सरकार का एक उपक्रम] प्रशासनिक कार्यालय, डीआईओएम, दोणीमलै टाउनशिप जिला बेल्लारी - 583118 मो.-8759411563