कविता

छठ पूजा

छठ शुक्ल पक्ष कार्तिक छठ तिथि को
छठी मातु की पूजा होती,
नर नारी के मन में जगती एक अलौकिक ज्योति ।
आस्था, श्रद्धा, विश्वास का त्योहार
छठ मइया की महिमा अपार,
जिसने लिया है इसको जान
सदा निरोग उसकी संतान।
प्रकृति से जुड़ा है इसका रिश्ता
सूर्यदेव से पावन नाता,
त्रिदिवसीय यह पर्व है प्यारा
गातीं गीत व्रती संसारा।
बिन पंडित त्योहार यह होता 
हर परिजन सहयोगी बनता,
अद्भुत खुशियों का नव उल्लास
वातावरण में जन-मन को दिखता ।
देवी संज्ञा मातुरुप में
छठी मैया मानी जाती, 
ठेकुआ, ईख, फल, फूल अर्पित कर 
छठ पर्व की पूजा होती।
संध्या को सूर्य संग देवी संज्ञा का,
व्रती नारियाँ स्वागत  करतीं
फिर प्रातः काल में अर्घ्य देकर 
फिर शाम विदाई रस्म निभातीं।

*सुधीर श्रीवास्तव

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