बाल कविता

बाल कविता – चंचल गौरैया

चूं-चूं करती गौरैया,
आँगन में आई गौरैया,
फुदक-फुदक कर इधर-उधर,
सबको भायी गौरैया।
तिनका लाए, तिनका जोड़े,
प्यारा सा घर बनाती,
मेहनत से वो कभी न थकती,
गीत खुशी के गाती।
धूप हो या हो बरसात,
नहीं कभी घबराती,
छोटे पंखों से ही देखो,
आसमान छू जाती।
हमको भी ये सिखलाती
मेहनत से फल पाओ,
नन्ही सी इस गौरैया से
जीना सही सीख जाओ।।

— गोपाल कौशल भोजवाल

गोपाल कौशल "भोजवाल"

नागदा जिला धार मध्यप्रदेश 99814-67300