कविता

फिर आओ राम जी

हे राम जी! सुना है कि आप आ रहे हो
तो इतनी भी क्या जल्दी है, जो अभी आ रहे हो,
थोड़े दिन बाद नहीं आ सकते क्या?
इतना परेशान होने की जरूरत भी नहीं है।
मगर अफसोस कि लगता है आपको बड़ी जल्दी है।
जो भी हो, अब मेरी बात सुनो प्रभु- 
मैं रामराज्य की बात तो नहीं पर इतना जरूर कहूँगा 
कि आने से पहले आज के वैश्विक संकट को भी देख लेना 
युद्ध की विभीषिका पर भी तनिक ध्यान दे देना।
क्या करना है क्या नहीं ये सब आप जानो,
बस! अब आप सिर्फ और सिर्फ मेरी बात मानो,
जैसे ही हो सारे के सारे युद्ध रोको, 
चाहे खुद कुछ करो या अपनी सेना बुला लो
हनुमान, जामवंत, सुग्रीव, अंगद, विभीषण 
नल नील और रीछों, भालुओं, वानरों को भी पुकार लो,
या फिर भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न को ही आदेश दे दो।
इसमें भी दिक्कत है तो यह जिम्मेदारी 
अपने होनहार पुत्रों लव-कुश को ही सौंप दो।
कुछ भी करो, मगर निर्दोषों को बेमौत मरने से बचा लो
धरती पर जगह-जगह श्मशान बनने पर रोक लगा दो,
दुनिया भर में विश्वयुद्ध का डर फैला रहा है,
मगर कुछ कलयुगिया रावणों की समझ में 
इतना भी नहीं आ रहा है।
बस! अब आप मेरी बात मानो 
मुझे दंड देने की सोच रहे हो तो आकर दे देना,
मगर आने से पहले आम-जन के डर दहशत का 
संपूर्ण समाधान करो, फिर आराम से आओ,
हम कुछ दिन और इंतजार कर लेंगे,
तब आपके आगमन से सिर्फ हम ही नहीं 
समूची दुनिया के जन-मानस भी बहुत खुश होंगे,
राम नाम के जयघोष की हुंकार से 
अखिल ब्रह्मांड तक गुँजायमान करेंगे।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921