नन्हा दीपक
नन्हे-नन्हे हाथों में,
जगमग करती ज्योति,
मुस्काता सा चाँद लगे,
उसकी प्यारी प्रीति।
धीरे-धीरे कदम बढ़ाए,
आँखों में उजियारा,
छोटी-सी ये रोशनी भी,
लगती कितना प्यारा।
टिम-टिम करती लौ बोले,
मत डर अंधियारे से,
नन्हा मन भी जीत सके,
हर मुश्किल किनारे से।
मासूमी की ये किरणें,
घर-आँगन महकाएँ,
नन्हा दीपक बनकर वो,
सबके दिल को भाएँ।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
