ज्ञान की ज्वाला
है जीतना अगर पौरुष के अंहकार से
ऐ नारी तूझे बार-बार हारना होगा खुद से !
स्वाभिमान की बड़ी कीमत होती है
इसे पाने के लिए लडना होगा हर किसी से !
कर्तव्यों और संस्कारो की बेड़ीयो में जकड़ कर
तूझे आजादी से रहने के मायने सिखलांएगे !
तुम्हारे हर प्रयास और बलिदान को
अपनी सफलता का परचम बना लहराएगे !
सारे भारी काम तुझसे करवाकर
तेरा नाम किसी भी तख्ती पर न लिखे जाएगे !
समाजिक आर्थिक सुरक्षा के नाम पर
तुम्हारे आजादी के सारे अधिकार छीने जाएगे !
हे पहचान बनानी है गर तुझको जमाने में
ज्ञान की ज्वाला जगानी होगी खुद के अंदर !
— विभा कुमारी :नीरजा”
