कविता

प्रकृति

सर्द हवाओं का दौर गुज़र चुका 

गर्म हवाएं बढ़ चली आ रही हैं 

यह कोई नई बात नहीं 

समय का चक्र अपनी गति से चलता है 

चल रहा 

शिकायत कैसी 

हाय गर्मी आ गई 

बरसात आ गई 

बड़ी ठंड है 

प्रकृति सब कर रही है 

बारी बारी 

तुम बस अनुभव करो 

बाकी सब उस पर छोड़ दो

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020