स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल) पर विशेष – स्वस्थ होने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा अपनाइए

इस बात पर सभी चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ एकमत हैं कि आकस्मिक दुर्घटनाओं को छोड़कर सभी रोगों का कारण हमारी गलत जीवनशैली है, जिसमें खान-पान, दिनचर्या, रहन-सहन, सामाजिक व्यवहार और कार्यप्रणाली सम्मिलित होते हैं। इसलिए अपनी जीवनशैली को सुधारकर हम सरलता से अधिकांश रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। दवाओं आदि से रोगों को कुछ समय के लिए दबाया अवश्य जा सकता है, लेकिन कभी भी उनसे पूरी तरह छुटकारा नहीं पाया जा सकता। इसके विपरीत दवाओं का अतिरेक अनेक नये रोगों को जन्म दे देता है।

जिस चिकित्सा पद्धति में केवल जीवनशैली में सुधार करके लगभग सभी रोगों से मुक्ति दिलायी जाती है, उसका नाम प्राकृतिक चिकित्सा है। इसमें कोई दवा नहीं ली जाती, बल्कि खान-पान, दिनचर्या, रहन-सहन आदि में सुधार करके रोगियों को स्वस्थ किया जाता है। दिनचर्या के अन्तर्गत इसमें कुछ योग, व्यायाम और अन्य क्रियायें करायी जाती हैं। केवल इतना करने से ही रोगी अति शीघ्र रोगमुक्त हो जाता है। इसमें कोई दवा नहीं होती, इसलिए किसी पार्श्व प्रभाव (साइड इफैक्ट) के होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। यह अवश्य है कि कई बार पुराने रोग उभर आते हैं, जो शीघ्र ही चले भी जाते हैं।

यों तो प्राकृतिक चिकित्सा देने वाले कई चिकित्सालय भी हैं, परन्तु प्राकृतिक चिकित्सा की विशेषता यह है कि आपको उनमें भर्ती होना अनिवार्य नहीं है। आप योग्य और अनुभवी प्राकृतिक चिकित्सक के निर्देशन में अपने घर पर ही रहकर अपनी चिकित्सा स्वयं कर सकते हैं और उसके लिए केवल घरेलू उपयोग की वस्तुओं की आवश्यकता होती है। इसमें भी अधिक नहीं बल्कि प्रातः लगभग एक घंटा और सायंकाल लगभग आधा घंटा समय देना पर्याप्त है। आप अपना दैनिक कार्य करते रह सकते है अर्थात् कोई छुट्टी लेने की आवश्यकता नहीं है। केवल गम्भीर रोगियों को ही प्राकृतिक चिकित्सालय में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। उनमें भी ऐलोपैथिक चिकित्सालयों की तुलना में बहुत कम खर्च होता है।

मैंने घरेलू प्राकृतिक चिकित्सा विधियों से पिछले 7 वर्षों में हजारों रोगियों को रोगमुक्त किया है और मुझे यह दावा करने में कोई संकोच नहीं है कि जिन रोगियों ने मेरे परामर्श का पूरा पालन किया है, उनमें से शत प्रतिशत रोगी पूर्णतः स्वस्थ हो गये हैं। जिन्होंने मेंरे परामर्श का आधा-अधूरा पालन किया है, उनको भी उसी अनुपात में लाभ हुआ है। मैं पीड़ितों को परामर्श देने का अब कोई शुल्क भी नहीं लेता। उनको उनकी दिनचर्या, खान-पान, चिकित्सा विधि, वीडियो आदि भेजकर इस प्रकार गाइड करता हूँ कि वे बिना किसी कठिनाई के अपना उपचार स्वयं कर लेते हैं। बीच-बीच में भी उनको गाइड करता रहता हूँ। कोई दवा नहीं, कोई खर्च भी नहीं और स्वस्थ होने की लगभग शत प्रतिशत गारंटी है।

पीड़ितों को पूरी तरह स्वस्थ होने में रोग की तीव्रता और पुरानेपन के अनुसार प्रायः दो-तीन माह का समय लग जाता है, लेकिन एक माह में ही काफी सुधार हो जाता है। पीड़ित रोगी में इतना विश्वास अवश्य होना चाहिए कि धैर्यपूर्वक अपनी चिकित्सा कर सकें। अधिकांश मामलों में रोगी पहले से ही किसी पद्धति की दवायें ले रहे होते हैं। ऐसी दवाओं को तुरन्त बन्द नहीं कराया जाता, बल्कि धीरे-धीरे कम करते हुए बन्द कराया जाता है। इसमें दवाओं की मात्रा के अनुसार एक या दो माह का समय लग जाता है।

मैंने जिन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का सफल उपचार किया है, उनमें से कुछ रोगों के नाम इस प्रकार हैं- पेट की सभी बीमारियाँ, डायबिटीज, उच्च और निम्न रक्तचाप, हृदय रोग, अनिद्रा, अवसाद, गठिया, दमा, सिर दर्द, माइग्रेन, मिर्गी, बवासीर-भगंदर, आँखों की कमजोरियाँ, कुछ प्रकार के पक्षाघात (लकवा), सर्वाइकल, स्पौंडिलाइटिस, सर्दी-जुकाम, नयी-पुरानी खाँसी, साइनस, थायरॉयड, रीढ़ के दर्द, कमर के दर्द, हाथ-पैरों के दर्द, मूत्राशय के रोग, कब्ज, संग्रहणी, हार्निया, साइटिका, घुटनों के दर्द, दाँत दर्द, मोटापा, कमजोरी, कम्पन रोग (पार्किंसन), अम्लपित्त (एसिडिटी), लीवर की कमजोरी, पथरी, स्वप्नदोष, नपुंसकता, बालों का झड़ना, आत्महत्या की प्रवृत्ति आदि-आदि।

इन रोगों के पीड़ितों के स्वस्थ होने की लगभग शत प्रतिशत गारंटी दी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति इनके अलावा किसी अन्य रोग से पीड़ित है, तो भी प्रयास किया जा सकता है, लेकिन उनको पूरी गारंटी नहीं दी जा सकती। कोई भी व्यक्ति मुझसे केवल लिखित सम्पर्क करके अपनी चिकित्सा ले सकते हैं। कृपया कोई कॉल न करें, क्योंकि मैं फोन पर बात नहीं करता। मेरा मोबाइल नं. 9919997596 है, जो व्हाट्सएप, अरट्टाई और टेलीग्राम पर उपलब्ध है। इनके अतिरिक्त आप मुझसे मैसेंजर तथा ईमेल से भी सम्पर्क कर सकते हैं। मेरा ईमेल पता है- vijaysinghal27@gmail.com. आप इनको अपने मित्रों, सम्बंधियों आदि सभी के साथ साझा कर सकते हैं।

कृपया ऐसे व्यक्ति ही मुझसे सम्पर्क करें, जो प्राकृतिक चिकित्सा लेने के बारे में गम्भीर हों। जो इस बारे में गम्भीर न हों, वे कृपया अपना और मेरा समय नष्ट न करें। धन्यवाद।

— डॉ. विजय कुमार सिंघल
चैत्र कृ. 4, सं. 2083 वि. (7 अप्रैल, 2026)

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com