ग़ज़ल
देखते बस तुम्हें देखते रह गए।
देख कर ये गेशू हम ठगे रह गए।।
खूबसूरत सी आँखे तुम्हारी सनम।
इश्क़ की डोर से हम बंँधे रह गए।।
दिल में उतरे जो तुम यूं हमारी सनम।
मिल गई जो नज़र हम थमे रह गए।।
रोज सजदा करूं दिल ये चाहे सनम।
करके दीदार फिर भी रुके रहे गए।।
कुछ न चाहत रही तुमको पाकर सनम।
तेरी दुनिया में हम तो रमे रह गए।।
— प्रीती श्रीवास्तव
