बलात्कार और जघन्य हत्या रोकने का संकल्प लेवें
बेटियों की सुरक्षा करने हेतु बलात्कार ,हत्या रोकने का संकल्प लेना आवश्यक है| |बलात्कार की खबरे समाचार पत्रों में पढ़ने को मिलती है| इसे पूर्णतया यानि 100 प्रतिशत रोकने हेतु समाज को संकल्प लेना होगा | इस बात को गहराई से सोचे कुल को बढ़ाने वाली,रिश्तों के मजबूत बंधन को बांधने वाली,बहन,माता,पत्नी आखिर किसी की भी बेटियाँ तो होती है |बेटी का बलात्कार और जघन्य हत्या क्यों करने लगा है | हत्या करने की जो मानसिकता विकसित हो रही है वो इंसान कि इंसानियत नहीं बल्कि शैतानियत को दर्शाता है | |बेटियाँ तो ओंस सी कोमल होती है,बेटियाँ हँसती तो मोती झरते है,बेटियाँ विदाई होने पर रोतीं है तो हर इंसान की आँखे रोतीं है |भावनाओ और ममत्व से जुड़ा होता है बेटियों का प्रेम |बेटियों के बिना त्यौहार भी सूने लगते है ,भाइयों कि कलाइयाँ भी सूनी होती है,श्रृंगार रस कि कल्पनाएं भी कोसो दूर रहती है |सच भी तो है| हमारे जीवन की साँस और आस होती है बेटिया |बलात्कार और जघन्य हत्या को रोकने का संकल्प लेवे |तभी भयमुक्त रह सकेगी बेटियां |
— संजय वर्मा ‘दृष्टी’
