माँ-सा न कोई दूजा
माँ, ममता की मूरत,
माँ, धरा का धीरज,
माँ, ममत्व का आँचल,
माँ, करुणा सागर।।
माँ, प्रभु प्रतिरूप,
माँ-सा न कोई दूजा।
धूप में छाँव शीतल,
जलधार सी निर्मल,
संस्कार से निर्मिति,
सुशोभिता संस्कृति।।
माँ, जीवन शिल्पकार,
माँ-सा न कोई दूजा।।
पत्थर को पारस बनाये,
सुरमई संगीत राग सिखाये,
माँ, गुरु, माँ अटल विश्वास,
बालमन का परिमल, उल्लास।।
माँ, जीवन आधार,
माँ-सा न कोई दूजा।।
माया, दुलार सरिता,
सर्वस्व लुटाये ममता,
मुस्कान शिशु की मनभाये,
तृप्त हॄदय, खिल खिल जाये।।
माँ, सृष्टि पालनहार,
माँ-सा न कोई दूजा।।
