वैश्वीकरण
पेट्रोलियम पदार्थों की मारा-मारी ने
बुन दिया कुछ ऐसा ताना-बाना
आज विश्व के लगभग सभी देश
आर्थिक तंगी का कर रहे सामना।।
पेट्रोल-डीजल की नित्य बढ़ती कीमतें
हालातों को और कर रही बेकाबू
घटता हुआ हमारा विदेशी मुद्रा भंडार
सामान्य उपायों से न आ रहा काबू ।
अब है समय की पुकार यही
पेट्रोलियम पदार्थों की खपत घटाएं
सार्वजनिक वाहनों का करें उपयोग
और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं।
थोड़े दिन सोना जो नही खरीदेंगे
तो ऐसा क्या कुछ जाएगा बिगड़
बढ़ेगा देश का विदेशी मुद्रा भंडार
और साथ ही कम होगा विदेशी ऋण।
विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता
गुलामी की तरफ करेगी अग्रसर
स्वदेशी को बढ़ावा देने पर ही
अन्ततः भारत बनेगा आत्मनिर्भर।
आज नही तो कल इन विषयों पर
मिलजुल सबको विचार करना होगा
जिन चीजों की कमी अपने देश में
उनका बेहतर इस्तेमाल करना होगा।
फिजूलखर्ची कैसी भी हो
उस पर स्वयं से रोक लगाइये
किसी के कहने का इंतजार क्यों करें
हो सके तो खुद समझदारी दिखाइये।
अल्पकालिक निर्णयों से बहुत दिन
समस्या का समाधान नही होने वाला
वैकल्पिक संसाधनों की तलाश करके
पाया जा सकता है स्थायी छुटकारा ।
वैश्वीकरण के इस बदलते दौर में
सबकी है एक-दूजे पर निर्भरता
शायद यही है इस वक्त की खूबसूरती
और शायद यही सबसे बड़ी दुर्बलता।
— नवल अग्रवाल
