हाइकु/सेदोका

हत्या का कलंक न लगे रिश्तों में

रिश्तों की डोर
धीरे-धीरे टूटे,
शब्दों की मार।

मन के आँगन
विश्वास के दीपक
क्यों बुझ जाते।

चेहरे हँसते,
भीतर मौन हिंसा
घर बना लेती।

क्रोध की आँच
रक्त नहीं बहाती,
मन जला देती।

रिश्तों के बीच
संदेह का बीज ही
काँटे उगाए।

ममता का वृक्ष
कटता नहीं हथियार से,
उपेक्षा से कटे।

सूखी आँखें
कई हत्याएँ सहकर
पत्थर बनतीं।

शब्दों का विष
धीरे-धीरे रिश्तों
का श्वास हर ले।

मनुष्य जीते
पर करुणा मर जाए,
कौन बचेगा।

स्नेह बचाना
युद्ध जीतने से भी
अधिक कठिन है।

हत्या न हो
विश्वासों की भीतर,
रिश्ते जीवित।

प्रेम की मिट्टी
कलंक से बच जाए,
यही प्रार्थना।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com

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