बाल कविता

बाल गीत- मीठी बोली

कोयल की है मीठी बोली,
वाणी में जैसे मिश्री घोली।

मीठी बोली लगती प्यारी,
मन में मिठास की फुलवारी।

जादू जगाते मीठे बोल,
बढ़ाते हैं आपसी मेलजोल।

काँटों में भी जो मुस्काती,
मीठी बोली फूल खिलाती।

मीठी-सच्ची वाणी बोलो,
वैर का विष कभी न घोलो।

मीठी बोली है वरदान,
कड़वी बोली जहर समान।

मीठी बोली बोलो प्यारे,
वही जग-जीवन को संवारे।

नम्रता और मीठी बोली,
इनसे मीठी न कोई गोली।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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