कविता

करुणा का दीप जलाएँ

जब किसी के आँसू पोंछो
तो समझो ईश्वर हँसता है,
टूटे मन को जब जोड़ो तुम,
हर दिल में सूरज बसता है।

करुणा कोई शब्द नहीं है,
यह तो बहती निर्मल धारा,
भूखे को जो भोजन देदे जो,
वही है सच्चा जग से प्यारा।

पशु-परिंदा हों या इंसान,
सब में एक ही ज्योत जले,
दर्द बाँट लो उनका थोड़ा,
तो जीवन उपवन-सा खिले।

घायल परिंदे को सहलाओ,
असहायों का हाथ थाम लो,
गिरते को जो उठा ले जग में,
उसका नाम करुणा रख लो।

आज करुणा दिवस आया है,
चलो हम प्रण एक नया करें,
नफरत की दीवार गिराकर,
प्रेम से दुनिया को भर दें।

न धर्म पूछे, न जात पूछे,
बस पीड़ा को पहचानें हम,
करुणादीप जलाएँ मिलकर,
हर दिल में इंसान बनें हम।

इस इस धरा पर जितने प्राणी
सब में एक आत्मा है बसती
प्राणी की आत्मा में नारायण
स्वरुप में ही प्रभुसत्ता बहती।

— मीना जैन जागृति

मीना जैन दुष्यंत

निवास -गोविंदपुरा भोपाल मध्यप्रदेश M- 9826738861 Email- meenajain14@gmail.com परिचय - शिक्षा - एम .ए. ( हिन्दी ,संस्कृत ,समाजशास्त्र)बी. एड. एम. फिल. ,वैद्य विशारद 2)व्याख्याता (हिन्दी, संस्कृत) शिक्षक -धार्मिक ,आध्यत्मिक प्रवचनकार 3) सामाजिक सेविका -.दस वर्षों से अखिल भारतीय स्तर पर निःशुल्क युवक -युवती परिचय सम्मेलन आयोजित करना।मंच सञ्चालिका 4) वैवाहिक सम्बन्धों( में खटास पड़ने पर )काउंसलर की भूमिका 6)महिलाओं के उत्थान के लिए कार्यरत। 7) कोरोना के समय महती भूमिका निभाने पर कोरोना योद्धा सम्मान समाज जन से। 8) साहित्यिक अभिरुचि.. लेख ,कथा ,कविता ,आदि लिखने पर सम्मान प्राप्त।

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