करुणा का दीप जलाएँ
जब किसी के आँसू पोंछो
तो समझो ईश्वर हँसता है,
टूटे मन को जब जोड़ो तुम,
हर दिल में सूरज बसता है।
करुणा कोई शब्द नहीं है,
यह तो बहती निर्मल धारा,
भूखे को जो भोजन देदे जो,
वही है सच्चा जग से प्यारा।
पशु-परिंदा हों या इंसान,
सब में एक ही ज्योत जले,
दर्द बाँट लो उनका थोड़ा,
तो जीवन उपवन-सा खिले।
घायल परिंदे को सहलाओ,
असहायों का हाथ थाम लो,
गिरते को जो उठा ले जग में,
उसका नाम करुणा रख लो।
आज करुणा दिवस आया है,
चलो हम प्रण एक नया करें,
नफरत की दीवार गिराकर,
प्रेम से दुनिया को भर दें।
न धर्म पूछे, न जात पूछे,
बस पीड़ा को पहचानें हम,
करुणादीप जलाएँ मिलकर,
हर दिल में इंसान बनें हम।
इस इस धरा पर जितने प्राणी
सब में एक आत्मा है बसती
प्राणी की आत्मा में नारायण
स्वरुप में ही प्रभुसत्ता बहती।
— मीना जैन जागृति
