गीत/नवगीत

जीत हार अब पीछे छूटी

नहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
कैसे खुश रहना सीखो तुम,
चलना ही जीवन सीखो तुम।
सुनना और देखना सीखो,
चुप रहना भी सीखो तुम।
नहीं कोई इच्छा थोपेंगे हम, नहीं रोकेंगे राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
लोगों की सुनना छोड़कर।
नहीं जोड़ना तुम्हें तोड़ कर।
मन की कर लो, खुशियाँ जी लो,
नहीं ले जाना तुम्हें मोड़ कर।
अपनी करना, अपना जीना, खुलती जाएं राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
अपने को स्वीकार करें हम।
जीना छोड़ें औरों के गम।
अपने लिए हो समय हमारा,
दिल से अपने कर्म करें हम।
मन-वचन और कर्म एक हो, खुशियाँ गाएं राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
पास होने की नहीं है चाहत।
नहीं चाहिए अब कोई राहत।
अपनी सोच उतार जमीन पर,
पूरी कर अब अपनी चाहत।
उत्कर्ष की राह बढ़ो तुम, प्रफुल्लित हों बांह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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