बाल कविता – मेरे प्यारे पिता जी
मेरे प्यारे पिता जी हैं,
सबसे अच्छे साथी।
मुझे खिलाते, मुझे हँसाते,
बातें करते प्यारी।
उँगली पकड़ चलना सिखाया,
सही राह दिखलाई।
गिर जाऊँ जब खेल-खेल में,
हिम्मत नई दिलाई।
मेहनत करके रोज़ कमाते,
घर में खुशियाँ लाते।
अपने दुख को भूल हमेशा,
हमको आगे बढ़ाते।
मैं भी खूब पढ़ाई करके,
उनका नाम बढ़ाऊँ।
मेरे प्यारे पिता जी को,
हर दिन शीश झुकाऊँ।
— गोपाल कौशल भोजवाल
