भाषा-साहित्य

मैं सादगी वाला लेखक हूँ

मैं बहुत लम्बा-चौड़ा लेखक नहीं हूँ। शब्दों का वार थोड़ा बहुत कर लेता हूँ। सादगी वाला लेखक हूँ। टुटे-फूटे भावों से भरी कुछ कवितायें लिख लेता हूँ। थोड़ी कहानियाँ भी लिख लेता हूँ। हास्य-व्यंग्य में थोड़ा बहुत प्रवीण हो गया हूँ।

कुछ गरीब, मजलूमों पर अपनी आवाज देने का प्रयास करता हूँ। कुछ उपमा का प्रयोग कर लेता हूँ। मुहावरे तथा लोकोक्तियों बचपन में याद कर लिया था। वह भी जोड़-गांठ करके वाक्य प्रयोग कर लेता हूँ। इतनी खुबियों वाला भी नहीं हूँ कि लोग फूल माला से लाद दे। साहित्यिक पुरस्कार ही दे दे।

मुझे आजादी पसंद है। शुरू से लेकर अब तक बंधन में नहीं रहा। विचारों को एक नई उड़ान दी है। स्वतंत्र चिंतन में सदैव रहना चाहता हूँ। कई समूहों में अपनी रचनायें भेजता हूँ लेकिन समूह के नियमों का पूर्णतया पालन नहीं कर पाता हूँ। एक स्वच्छंदता में रहना थोड़ा ज्यादा पसंद करता हूँ।

यही वजह है कई साहित्यिक संस्थायें हमारी पोस्ट पर चाबुक चला देती हैं। निहत्था आदमी क्या कर सकता है? मैं ढेर सारे लोगो के चेहरे पढ़ता हूँ। उनके भावों विचारों को देखता समझता हूँ। इन्हीं सब पर अपनी लेखनी चला देता हूँ। कुछ घातक व्यंग्य भी लिख देता हूँ जो सामने पड़ा उस पर घातक वार हो जाता है और वह मुंह फेर कर चल देता है या सुधार लाने की कोशिश करता है।

कुछ लोगो के अंदर भाई हैवानियत इस कदर भर गयी है। उसकी अकल काम करना बंद कर देती है। राजस्थान में एक तेरह वर्षीय छात्रा के साथ ढाई दर्जन से ज्यादा लोगों की आत्मा ही मर गयी थी। एकदम जानवर बन गये। एक के अंदर भी रहम नहीं जागा।

सरकार को सख्त होने की जरूरत है। जो जैसा अपराध किया है उसको सेम उसी प्रकार के दण्ड की व्यवस्था करे। कोई किसी को पटक-पटक कर मारा है तो उसको भी पटक-पटककर मारने का आदेश हो। जो अभी अंधे बने हैं उनका तीसरा नेत्र खुल जाये।

इन सब चीजों पर होती घटनाओं से दिल दहल जाता है। ऐसी घटनाओं से आत्मा की भी आत्मा कांप जाती है। तब मेरी कलम से अंगारों का गोला निकलना शुरू हो जाता है। इन दरिंदों पर कोई कोई फरक नहीं पड़ता है। इनकी बुध्दि घास चरने चली जाती है। अरे जानवरों ! जानवरों में चरित्र नहीं होता है लेकिन चरित्रवान होते हैं लेकिन तुम पढ़ लिखकर भी जानवरों से भी गिरे हो। न तो चरित्र है, न तो चरित्रवान ही हो।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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