मैं सोचता हूं
मैं सोचता हूं …
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास पर दिया धरना
फिर देर रात छोड़ दिया सबको थाने से
जंतर- मंतर पर चली पुलिस की लाठियां
दिल्ली में अराजकता का माहौल
अमित शाह मिले गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में
सोनम बांगचुंग से
किसानों का धरना हुआ स्थगित
और इन ताजा खबरों के साथ-साथ
आई एक सबसे बुरी खबर
सुरंग निर्माण में लगे पच्चीस मजदूर दब गए सिक्किम में सुरंग के भीतर ही
युद्ध स्तर पर प्रशासन लगा है उनको निकालने में
कुछ शव निकाले जा चुके हैं
कुछ अभी फंसे हैं सुरंग में ही राष्ट्र निर्माण में लगे
योद्धाओं के
मरने वालों के लिए पांच लाख मुआवजा और घायलों के लिए पचास -पचास हजार की घोषणाएं
कल तक नई खबरों के आते ही ये सारी खबरें
पुरानी हो जाएगी परंतु
जिन परिवारों के मजदूर बच्चे लगे थे राष्ट्र निर्माण में सुरंग खोदने
उनके लिए न तो सुरंग में अपनों के फंसने की खबरें
पुरानी होंगी और न समय के दिए जख्म ।
मैं सोचता हूं-
राष्ट्र निर्माण में लगा हुआ कोई व्यक्ति यदि मर जाए तो
सरकारी दस्तावेजों में उसे शहीद क्यों नहीं
लिखा जाता?
और मजदूर की शहादत का मुआवजा
पांच लाख की जगह
एक -दो करोड़ क्यों नहीं हो जाता?
बाकी जनता भी सब जानती है पक्ष भी और विपक्ष भी।
किसकी पीठ पर
कितनी रोटियां सेंकी जा सकती हैं
कितनी सेंकी जा रही हैं इस सब का गणित भी।
आज की ताजा खबरें कल सब की सब
बासी हो जाएंगी परंतु समय के दिए ये जख्म
कब बासी होंगे कोई नहीं जानता।
— अशोक दर्द
