लघुकथा

उम्मीद की खिड़की

सोनबरसा गाँव के आख़िरी छोर पर कावेरी अम्मा का पुराना घर था। बरसात होते ही वह खिड़की के पास बैठकर दूर तक देखती रहतीं। पच्चीस वर्ष पहले, ऐसी ही एक बरसाती शाम उनका पंद्रह वर्षीय बेटा नंदू नदी की तेज़ धार में लापता हो गया था। वह बच्चों को सुरक्षित जगह पहुँचाने गया था। बच्चे लौट आए, नंदू नहीं। बहुत खोज हुई, पर उसका कोई पता न चला। गाँव ने मान लिया कि नदी उसे बहा ले गई, मगर कावेरी अम्मा की उम्मीद नहीं बही।
समय बीतता गया। नंदू अब चालीस वर्ष का होता। अम्मा के संदूक में उसकी स्कूल की कॉपी, तस्वीरें और कुछ निशानियाँ अब भी सुरक्षित थीं।
एक रात बादल फटा और नदी का पानी गाँव में घुसने लगा। लोग बच्चों और जरूरी सामान के साथ ऊँचे टीले की ओर भागने लगे। अम्मा भी घर छोड़ने लगीं, तभी संदूक खुल गया। कॉपी के एक पन्ने पर नंदू ने बचपन में गाँव का नक्शा बनाया था। उसमें खेतों के बीच पुरानी जल-निकासी नाली का निशान था।
अम्मा को याद आया- “पानी को रास्ता मिल जाए तो वह घर नहीं डुबोता।”
उन्होंने गाँव के युवकों को साथ लिया। रातभर मिट्टी हटाई गई। नाली खुली और पानी का रुख बदल गया। गाँव बच गया।
अगली सुबह बारिश थमी तो एक चालीस वर्षीय यात्री गाँव में दाखिल हुआ। गाँव बहुत बदल चुका था। वह रास्ता पूछते-पूछते अपने घर के पास आकर रुक गया। नई सड़कें और अनजान चेहरे देखकर वह ठिठक गया। तभी उसकी नजर उस पुरानी खिड़की पर पड़ी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। खिड़की के पास बैठी कावेरी अम्मा ने सिर उठाया।
“अम्मा…” आवाज़ सुनकर उनका चेहरा काँप उठा। उन्होंने उसके चेहरे को छुआ। बाईं भौंह के ऊपर वही छोटा-सा निशान था—बचपन में आम के पेड़ से गिरने की चोट का। “नंदू!” बस इतना कहते ही वह माँ के चरणों में झुक गया। अम्मा ने उसे उठाकर सीने से लगा लिया। पच्चीस वर्षों का सन्नाटा दोनों की आँखों से बह निकला।
नंदू बाढ़ में बहकर दूसरे गाँव पहुँचा था। एक परिवार ने उसकी जान बचाई। परिस्थितियों ने उसे वर्षों दूर रखा, लेकिन माँ और गाँव की स्मृतियाँ उसके भीतर जीवित रहीं। आखिर वह घर लौट आया था। उस शाम अम्मा फिर खिड़की के पास बैठीं। इस बार बाहर नहीं देख रही थीं।
नंदू उनके पास था।
तब से सोनबरसा में लोग उस खिड़की को “उम्मीद की खिड़की” कहने लगे, क्योंकि सच्ची प्रतीक्षा समय से नहीं हारती।

— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016

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