कविता

राष्ट्र का गौरव है हिंदी

(१)
अपनी भाषा की तरक्की से ही
होगी देश की तरक्की।
जो अपनी मां को भूल गया
वह तरक्की क्या कर पाएगा?
जो अपनी भाषा को भूल गया
वह देशभक्ति क्या निभाएगा?
हिंदी की पहचान से,
देश के स्वाभिमान से
राष्ट्र हमारा आगे बढ़ेगा।
जन-जन को हिंदी गढ़ेगा,
जब बच्चा-बच्चा हिंदी पढ़ेगा,
तब राष्ट्र होगा हमारा सशक्त और
सम्मान के शिखर पर चढ़ेगा,
एक दिन विश्व की आवाज़ बनेगा।
(२)
संस्कारों की भाषा हिन्दी।
आदर्शों की आशा हिन्दी।
जन-मन की अभिलाषा हिंदी।
भारत की पहचान है हिंदी।
देश का अभिमान है हिंदी।
भारत मां के भाल की बिंदी।
राष्ट्र का गौरव है हिंदी।
(३)
विविधता में एकता का गान है हिंदी।
हर भारतवासी के दिल की धड़कन है हिंदी।
तुलसी,कबीर और मीरां की वाणी है हिंदी।
हर पीढ़ी को जो जोड़ दे, वो अमर कहानी है हिंदी।
सरल,सहज मीठी वाणी- सी है हिंदी।
जैसे माथे का चंदन और रंगों की होली है हिंदी।
दिल के कानों से कोई सुने तो सुधा रस घोले हिंदी।
विश्व पटल पर गूंजे सदा एक ऐसी जय-गान है हिंदी।
ज्ञान और संस्कारों की परिपाटी है हिंदी।
हम सब का गौरव, हम सब की शान है हिंदी।

— डॉ. कान्ति लाल यादव

डॉ. कांति लाल यादव

सहायक प्रोफेसर (हिन्दी) माधव विश्वविद्यालय आबू रोड पता : मकान नंबर 12 , गली नंबर 2, माली कॉलोनी ,उदयपुर (राज.)313001 मोबाइल नंबर 8955560773

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