हम ही भरोसे की पहचान हैं
विश्वास दीप
अँधियारा हर ले
मन उजले।
सच्चे वचन
रिश्तों की नींव
अटल रहे।
निर्मल मन
छल से दूर रहे
प्रेम खिले।
संकट आए
हाथ न छोड़ें
साथ निभाएँ।
मुस्कानों में
अपनापन महके
मन जुड़े।
सत्य की राह
कदम बढ़ते रहें
जीवन धन्य।
विश्वास जहाँ
वहीं सुख बसता
मन प्रसन्न।
भरोसे से
हर रिश्ता महके
जीवन खिले।
निस्वार्थ भाव
सबको अपनाए
प्रेम अमर।
सद्भावना
हर दिल में गूँजे
शांति फले।
हम ही बने
विश्वास की छाया
सबका बल।
हम ही सदा
भरोसे की पहचान
यही सम्मान।
— डॉ. अशोक
