मुसीबत में इंसानियत
मुश्किल घड़ी
बढ़े दया के हाथ
जगे विश्वास।
सूनी राहें
साथ चले कोई
मन सँभले।
भीगा आँचल
आँसू पोंछे जो
वही अपना।
रोटी बाँटी
भूख हुई हल्की
मन तृप्त।
नर्म शब्द
घावों पर मरहम
जीवन खिले।
करुणा दीप
तम को हर ले
आशा जगे।
थका मुसाफ़िर
मिले सहारा
राह सरल।
मानव धर्म
सेवा में बसता
प्रेम अमर।
— डॉ. अशोक
