नन्हा मुसाफ़िर
नन्हे हाथ सहारा लिए, आँखों में विश्वास।
हँसकर करता हर सफ़र, मन में मधुर प्रकाश॥
कार चली तो झूमकर, पकड़ी ऊपर डोर।
बाल हृदय की चंचलता, लाए हँसी की भोर॥
नन्हे सपनों के लिए, खुला गगन विस्तार।
हिम्मत जिसके संग हो, जीते वह संसार॥
मुस्कानों की छाँव में, खिलता जीवन-फूल।
बचपन सबसे अनमोल है, सच्चा जग का मूल॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
