कविता

कविता

जिंदगी तो वो भी थी जिसे मैंने जिया
जिंदगी तो वो भी है जिसे मैं जी रही हूं
जिंदगी तो वो भी होगी जिसे मैं कल जिऊंगी
किन्तु बिना किसी मकसद के जिंदगी, जिंदगी कहलाएगी
बिना किसी ख्वाहिश के, क्या जिन्दगी में जोश होगा
बिना किसी चाहत के, क्या जिन्दगी में प्यार होगा
यूं तो जिंदगी बहुत कुछ कहती हैं
किन्तु इन सब चीजों के बिना
जिंदगी कभी जिन्दगी हो नहीं सकती
जिंदगी मौज हैं, एक रोमांचक सफर है
जिसे हमेशा खुलकर जीना चाहिए…

— गंगा मांझी

गंगा मांझी

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

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