धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वण मास की महिमा और सनातन संस्कृति की दिव्यता

सनातन संस्कृति में काल गणना केवल समय का बोध नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा के बीच के गहन तादात्म्य का उत्सव है। इन उत्सवधर्मी महीनों में श्रावण मास(सावन का महीना) का स्थान सर्वोपरि और अत्यंत पावन माना गया है। यह मास केवल एक ऋतु का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा और परमात्मा के मिलन, प्रकृति के पुनरुद्धार और हमारी शाश्वत आस्था का जीवंत प्रतीक है।
प्रकृति का शृंगार और सृजन का उल्लास
श्रावण मास का आगमन ग्रीष्म ऋतु की तपन से त्रस्त धरती पर अमृत वर्षा लेकर आता है। जब आषाढ़ की उमस के बाद आसमान बादलों से घिरता है और मूसलाधार वर्षा होती है, तब प्रकृति मानो नई देह धारण कर लेती है।
चतुर्दिक हरियाली, सूखी और बंजर भूमि पर दूब और घास की चादर बिछ जाती है, वृक्षों पर नए कोपले फूटते हैं और कल-कल करती नदियाँ उफान पर होती हैं।
पंचतत्वों का संतुलन,, यह मास हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार वर्षा प्रकृति की पिपासा को शांत कर उसमें नया जीवन फूंकती है, उसी प्रकार भक्ति की वर्षा हमारे अंतःकरण को सींचकर जीवन को ऊर्जावान बनाती है। देवाधिदेव महादेव को समर्पित परम पवित्र मास
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इसी मास में माता पार्वती ने शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और भोलेनाथ ने उनकी मनोकामना पूर्ण की थी।
महामृत्युंजय और रुद्राभिषेक,, इस पूरे मास में देवाधिदेव महादेव की आराधना का विशेष महत्व है। शिवालयों में ‘ॐ नमः शिवाय’ के मंत्र गूंजते हैं और बेलपत्र, धतूरा, भांग तथा गंगाजल से भगवान का रुद्राभिषेक किया जाता है।
सावन सोमवार का व्रत,, हर सोमवार को रखे जाने वाले व्रत साधक को मानसिक शांति, संयम और अदम्य साहस प्रदान करते हैं। यह व्रत वासनाओं और विकारों पर नियंत्रण का संदेश देता है।
कांवड़ यात्रा,,, अटूट विश्वास और समर्पण की पराकाष्ठा
श्रावण मास की दिव्यता का सबसे विहंगम दृश्य देश के विभिन्न भागों में दिखाई देने वाली **कांवड़ यात्रा है। भगवा वस्त्र धारण किए, नंगे पाँव मीलों की पैदल यात्रा करते हुए शिव भक्तों (कांवड़ियों) का यह समूह सनातन आस्था का सबसे प्रेरणादायक स्वरूप है।
कंठ में ‘बम-बम भोले’ का उद्घोष और कंधे पर गंगाजल से भरे कांवड़ को उठाए ये भक्त बिना थके अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं।
यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समर्पण, अनुशासन, और कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम,,की जीवंत मिसाल है।
हमारी संस्कृति के उत्सव और लोक-पर्व
सावन का महीना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और लोक-संस्कृति का भी महाकुंभ है।
नाग पंचमी, प्रकृति के हर जीव के प्रति करुणा का भाव रखते हुए नाग देवता की पूजा की जाती है।
श्रावणी पूर्णिमा (रक्षा बंधन),,यह मास भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास के प्रतीक पर्व ‘रक्षा बंधन’ के साथ संपन्न होता है, जो सामाजिक बंधनों और कर्तव्यों की याद दिलाता है।
सावन के गीत और झूले, महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले कजरी, मल्हार और पेड़ों पर डाले जाने वाले झूले हमारी लोक-संस्कृति की जीवंतता और उल्लास के परिचायक हैं।
श्रावण मास हमें यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बाधाएँ और तपिश क्यों न आएँ, आस्था और प्रेम की फुहार हर संकट को पार करने की शक्ति देती है। यह मास हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने, आंतरिक शुद्धि प्राप्त करने और प्रकृति के साथ एकाकार होने का स्वर्णिम अवसर है। भगवान भोलेनाथ की कृपा से यह पावन मास हम सबके जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे, यही सनातन संस्कृति की मूल प्रार्थना है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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