नन्हा हाथी वाला
नन्हे हाथों की खुशी,
भोली-सी मुस्कान।
हाथी संग खेला करे,
मेरा नन्हा जान॥
पीला-नीला हाथिया,
चलता धीरे-धीरे।
हँसी बिखेरे आँगना,
खुशियाँ घेरे-घिरे॥
धक्का देकर बोलता,
“चल रे मेरे यार।”
सपनों की इस रेल में,
लगता जग साकार॥
गिरकर फिर से उठ गया,
हिम्मत रखता हाथ।
छोटे-छोटे पग बढ़े,
बनते जीवन साथ॥
मम्मी-पापा देख कर,
भर लें मन में प्यार।
बचपन सबसे कीमती,
जीवन का उपहार॥
नन्हे हाथों की खुशी,
भोली-सी मुस्कान।
हाथी संग खेला करे,
मेरा नन्हा जान॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
